गाँव के किनारे एक बहुत पुराना कुआँ था। दिन के समय भी उसके पास पहुँचते ही माहौल कुछ अलग सा महसूस होता था। कुआँ काफी गहरा था और उसके चारों तरफ पत्थरों की पुरानी दीवार बनी हुई थी। कभी यही कुआँ पूरे गाँव के लोगों के लिए पानी का सहारा हुआ करता था।
उसी गाँव में श्रुति नाम की एक लड़की रहती थी। वह बचपन से ही बहुत चंचल और हँसमुख थी। उसकी हँसी की आवाज़ दूर तक सुनाई देती थी और गाँव के लोग उसे बहुत पसंद करते थे।
एक दिन श्रुति हमेशा की तरह उस पुराने कुएँ से पानी भरने गई। उसके हाथ में पानी भरने का बर्तन था और वह कुएँ के किनारे खड़ी होकर रस्सी नीचे डाल रही थी।
उसी समय वहाँ मदन भी मौजूद था। दोनों की उम्र लगभग एक जैसी थी। मदन ने पीछे से कदम बढ़ाया और अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया। उसका हाथ श्रुति से टकराया।
श्रुति संभल नहीं पाई।
वह सीधे कुएँ के अंदर जा गिरी।
कुआँ बहुत गहरा था। गाँव के लोगों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जब तक उसे बाहर निकाला गया, बहुत देर हो चुकी थी।
श्रुति की मौत हो चुकी थी।
मदन के लिए यह घटना एक ऐसा बोझ बन गई जिसे वह अपनी पूरी जिंदगी अपने साथ लेकर चलता रहा। वह बार-बार यही सोचता था कि अगर उस दिन उसका हाथ श्रुति से नहीं टकराया होता, तो शायद वह आज भी गाँव की गलियों में हँसती हुई घूम रही होती।
समय गुजरता गया। एक साल बीता, फिर दूसरा और देखते ही देखते कई साल निकल गए। धीरे-धीरे लोगों ने उस घटना के बारे में बात करना भी कम कर दिया।
लेकिन कुआँ वहीं था।
खामोश।
और बंद।
कई साल बाद कुएँ से फिर पानी निकला
एक गर्म दोपहर कुछ चरवाहे अपने जानवरों को लेकर गाँव के बाहर से गुजर रहे थे। उनके पास पानी खत्म हो चुका था। काफी देर तक चलने के बाद उन्हें वही पुराना कुआँ दिखाई दिया।
एक चरवाहे ने कुएँ की तरफ देखते हुए कहा,
दूसरे चरवाहे ने उसे रोकने की कोशिश की। उसने गाँव के बुजुर्गों से उस कुएँ के बारे में सुना था।
लेकिन प्यासे जानवरों को देखकर उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उन्होंने रस्सी नीचे डाली और कई सालों बाद पहली बार उस कुएँ से पानी बाहर निकाला।
उन्हें उस समय कुछ भी असामान्य दिखाई नहीं दिया।
पानी लेकर वे अपने जानवरों के साथ गाँव से आगे निकल गए।
लेकिन उसी रात गाँव में कुछ ऐसा हुआ जिसे सुनकर पुराने लोगों के चेहरे तक बदल गए।
रात में आई वह हँसी
रात काफी हो चुकी थी। गाँव के ज्यादातर लोग अपने घरों में सो चुके थे। बाहर चारों तरफ सन्नाटा था।
तभी गाँव के एक घर के बाहर बैठे बुजुर्ग को दूर से किसी लड़की के हँसने की आवाज़ सुनाई दी।
पहले उन्हें लगा कि शायद उनका भ्रम है।
लेकिन कुछ देर बाद वही हँसी दोबारा सुनाई दी।
इस बार आवाज़ पुराने कुएँ की दिशा से आ रही थी।
बुजुर्ग का चेहरा अचानक पीला पड़ गया। उन्हें कई साल पुरानी वह घटना याद आ गई।
उन्होंने घर का दरवाजा बंद किया और अपने परिवार से कहा कि कोई भी बाहर नहीं जाएगा।
लेकिन उस रात केवल एक घर ने वह आवाज़ नहीं सुनी थी।
गाँव के कई लोगों ने उसी लड़की की हँसी सुनी।
मदन ने भी सुना
उस समय मदन भी अपने घर में मौजूद था। इतने सालों बाद जब उसने वह हँसी सुनी, तो उसके शरीर में जैसे जान ही नहीं रही।
उसे तुरंत श्रुति याद आ गई।
वही लड़की।
वही कुआँ।
वही दिन।
और वही गलती।
अचानक उसके घर के बाहर किसी के कदमों की आवाज़ आई।
मदन ने सांस रोक ली।
कुछ सेकंड बाद दरवाजे के बिल्कुल बाहर से एक लड़की की धीमी आवाज़ सुनाई दी।
मदन के हाथ कांपने लगे।
उसने कोई जवाब नहीं दिया।
फिर वही आवाज़ आई।
मदन की आँखों में आँसू आ गए।
उसने दरवाजा नहीं खोला।
कुछ देर बाद बाहर फिर वही हँसी सुनाई दी। लेकिन इस बार वह हँसी धीरे-धीरे दूर होती चली गई।
अगली सुबह
सुबह होते ही गाँव के कई लोग उस पुराने कुएँ के पास पहुँचे। किसी में भी रात की घटना के बाद अकेले वहाँ जाने की हिम्मत नहीं थी।
जब उन्होंने कुएँ के आसपास की जमीन देखी, तो वहाँ गीले पैरों के निशान दिखाई दिए।
निशान कुएँ से निकलकर गाँव की तरफ जा रहे थे।
लोग उन निशानों को देखते हुए कुछ दूर तक गए, लेकिन अचानक वे निशान गायब हो गए।
एक बुजुर्ग ने धीमी आवाज़ में कहा,
किसी ने उसकी बात का जवाब नहीं दिया।
लेकिन उस दिन से गाँव में एक अजीब डर फैल गया।
कुएँ के पास आखिरी सामना
उस रात मदन अकेला उस कुएँ के पास चला गया। शायद उसे लगता था कि इतने वर्षों से जिस घटना से वह भागता रहा था, अब उसका सामना करना ही पड़ेगा।
वह कुएँ के किनारे खड़ा रहा और नीचे देखने लगा।
कुछ पल तक पानी बिल्कुल शांत रहा।
फिर पानी में हल्की-सी लहर उठी।
मदन पीछे हट गया।
कुएँ के अंदर से वही लड़की की हँसी सुनाई दी।
मदन ने कांपती आवाज़ में कहा,
कुछ देर तक सिर्फ हवा की आवाज़ सुनाई देती रही।
फिर कुएँ के पानी में एक चेहरा दिखाई दिया।
मदन की आँखें खुली की खुली रह गईं।
वह चेहरा श्रुति का था।
लेकिन उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं था।
बस एक गहरी उदासी थी।
मदन कुछ बोल नहीं पाया।
मदन की आँखों से आँसू निकलने लगे।
उसने सिर झुका लिया और पहली बार पूरी सच्चाई स्वीकार कर ली।
अगली सुबह उसने गाँव के लोगों के सामने बताया कि उस दिन वास्तव में क्या हुआ था। उसने यह भी माना कि इतने सालों तक वह डर के कारण सच नहीं बता पाया था।
उसके सच बोलते ही जैसे गाँव का वह पुराना डर धीरे-धीरे खत्म होने लगा।
उस दिन के बाद श्रुति की हँसी फिर कभी किसी ने नहीं सुनी।
कुआँ हमेशा के लिए बंद कर दिया गया
गाँव वालों ने उस कुएँ को हमेशा के लिए बंद कर दिया। उसके ऊपर बड़े पत्थर रख दिए गए ताकि कोई दोबारा वहाँ से पानी न निकाल सके।
मदन ने भी कुछ समय बाद गाँव छोड़ दिया। लेकिन जाने से पहले वह एक बार फिर उस कुएँ के पास गया।
उसने चुपचाप श्रुति से माफी मांगी।
उस रात पहली बार कुएँ के आसपास कोई आवाज़ नहीं आई।
न कोई हँसी।
न कोई कदमों की आवाज़।
न पानी में कोई हलचल।
बस एक अजीब-सी शांति थी।
क्या श्रुति सच में वापस आई थी?
आज भी इस सवाल का कोई निश्चित जवाब नहीं है। कुछ लोग मानते हैं कि वह श्रुति की आत्मा थी, जो इतने वर्षों बाद उस कुएँ से वापस आई थी।
कुछ लोग इसे गाँव के लोगों के डर और पुराने अपराधबोध से जोड़कर देखते हैं।
लेकिन गाँव के बुजुर्ग आज भी उस पुराने कुएँ के पास जाने से बचते हैं।
उनका कहना है कि कुछ जगहों पर बीती हुई घटनाएँ सिर्फ यादें बनकर नहीं रहतीं।
वे अपने पीछे एक ऐसी खामोशी छोड़ जाती हैं जिसे हर कोई महसूस कर सकता है।
कुछ कहानियाँ मौत के साथ खत्म नहीं होतीं।
कुछ कहानियाँ तब तक लौटती रहती हैं,
जब तक उनका सच सामने नहीं आ जाता।
✦ कहानी का अंत ✦
कहा जाता है कि आज भी उस गाँव में कोई उस पुराने कुएँ के पास रात में नहीं जाता। कभी-कभी बहुत शांत रातों में वहाँ से हवा के साथ किसी लड़की की हल्की-सी हँसी सुनाई देने की बात कही जाती है।
लेकिन अब कोई उस आवाज़ का पीछा नहीं करता।
क्योंकि गाँव के लोग जानते हैं कि वह कुआँ सिर्फ पानी का कुआँ नहीं है। उसके अंदर एक ऐसी कहानी दबी है जिसे समय भी पूरी तरह मिटा नहीं सका।
और शायद श्रुति सच में लौटकर आई थी...
या शायद कुछ यादें इतनी गहरी होती हैं कि वे इंसान के जाने के बाद भी उसी जगह पर मौजूद रहती हैं।
सवाल सिर्फ इतना है—अगर उस रात श्रुति की हँसी सच में कुएँ से आई थी, तो वह आखिरी बार किसे बुला रही थी?

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